"तुम्हारी सभ्यता"
ऐ हिन्द तेरी सभ्यता क्या है ? ज़रा चिंतन करो
करते हो किसका अनुसरण, निज तर्क से मंथन करो ।।
करते हो किसका अनुसरण, निज तर्क से मंथन करो ।।
आज तुम् पथभ्रष्ट हो , पाश्चात्य में ढलने लगे
विभत्स, पाश्विक सभ्यता, का अनुसरण करने लगे ।।
विभत्स, पाश्विक सभ्यता, का अनुसरण करने लगे ।।
तुम् सूरा और सुंदरी, में अधिक रमने लगे
निज सभ्यता की अस्मिता पर, प्रश्न चिंन्ह बनने लगे ।।
निज सभ्यता की अस्मिता पर, प्रश्न चिंन्ह बनने लगे ।।
सुनामा (नारी) के नए परिधान के, हर दृश्य से विक्षुबब्ध हूँ
अपनी विभुषित सभ्यता, के त्यजन से निश्बद्ध हूँ ।।
अपनी विभुषित सभ्यता, के त्यजन से निश्बद्ध हूँ ।।
अपना सुयश इतिहास है, और सभ्यता इतनी बड़ी
इस निखिल संसार में, हम शांति के पर्याय हैं ।।
इस निखिल संसार में, हम शांति के पर्याय हैं ।।
ऐ हिन्द तेरी सभ्यता क्या है ? ज़रा चिंतन करो
करते हो किसका अनुसरण, निज तर्क से मंथन करो ।2।
करते हो किसका अनुसरण, निज तर्क से मंथन करो ।2।
© राजनिश प्रियदर्शी
27/09/2016
27/09/2016
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